Wednesday, March 2, 2016

उत्तराखंड मुक्त विश्वविधालय के स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस द्वारा, उत्तराखंड साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च सेण्टर(युसर्क), देहरादून के सहयोग से साइबर सिक्यूरिटी विषय पर १९-२० फरवरी को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया| 
कार्यशाला में देश भर से आए विशेषज्ञों द्वारा साइबर सिक्यूरिटी की चुनोतियों  पर गहन मंथन किया तथा विश्वविधालय द्वारा इस विषय पर जागरूकता पैदा करने हेतु निशुल्क नॉन- क्रेडिट ऑनलाइन प्रोग्राम चलाये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया|  कार्यशाला समन्वयक एवं प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. जीतेंद्र पाण्डे ने कहा की आज हम डिजिटल सर्विसेस से लिए इंटरनेट पर निर्भर है इसलिए इनफार्मेशन सिक्यूरिटी की जानकारी होना सभी के लिए आवश्यक है| आज के युग में लोगों को कंप्यूटर एवं इन्टरनेट के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों जैसे टेक्नोलॉजी, एकाउंटिंग , सेल्स, मार्केटिंग आदि प्रशिक्षित किया जा रहा है लेकिन साइबर सिक्यूरिटी के बुनियादी ज्ञान की कमी है। साइबर सुरक्षा की तकनीक की जानकारी व्यक्तियों, व्यवसायों , सरकारों, और शैक्षिक संस्थानों के लिए आवश्यक है| उत्तराखंड मुक्त विश्वविधालय द्वारा युसर्क के सहयोग से आम लोगों में एक साइबर सिक्यूरिटी के बारे मे जागरूकता बढाने के लिए निशुल्क नॉन-क्रेडिट ऑनलाइन साइबर सिक्यूरिटी प्रोग्राम लांच किया जा रहा है, जो की विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा| 
निदेशक युसर्क एवं कंप्यूटर साइंस, प्रोफेसर दुर्गेश पन्त ने बताया की इन्टरनेट के माध्यम से सारी दुनिया आपस में जुड़ चुकी है, जो राष्ट्रों के लिए नई चुनौतियों प्रदान करता है क्योंकि क्षेत्रीय या राष्ट्रीय सीमाओं का सूचना के प्रवाह पर नियंत्रण नहीं है| ऑनलाइन यूजर एवं उपभोक्ताओं पर साइबर क्रिमिनल्स द्वारा कंप्यूटर वायरस,  मालवेयर,  स्पाइवेयर, का इस्तेमाल कर आपकी महत्वपूर्ण एवं व्यक्तिगत जानकारी को चुरा कर आपको आर्थिक हानि एवं आपकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजानिक करके आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाया जा सकता है| उन्होंने कहा कि राज्य में नवयुवकों को साइबर एवं इनफार्मेशन सिक्यूरिटी में प्रशिक्षण देकर “साइबर स्वयंसेवक” (cyber volunteers) बनने हेतु प्रेरित करने के आवश्कता है, जो समय आने पर साइबर दुनिया की चुनौतियों  से निपटने में राष्ट्र को अपना योगदान दे सकें|
कुलपति प्रोफेसर सुभाष धुलिया ने साइबर सिक्यूरिटी की जानकारी के बारे में लोगों को शिक्षित करने पर जोर दिया| उन्होंने बताया की किस प्रकार आम आदमी अपनी दिन प्रतिदिन के जरूरतों के लिए इन्टरनेट पर निर्भर हो गया हैं तथा उसकी एक चूक उसे भारी नुकसान पंहुचा सकती है|  


दिल्ली से आये साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ग्रुप कैप्टिन अशोक कटारिया ने  प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए बताया की इन्टरनेट को इस्तेमाल करते हुए किन किन सावधानियों का प्रयोग करके साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है|  

भारतीय साइबर इमरजेंसी रेस्पोंसे टीम से आये वैज्ञानिक श्री आशुतोष बहुगुणा जी ने बताया कि  सोशल नेटवर्किंग साइट्स को इस्तेमाल करने में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए |

  इस परियोजना के संपादन में भारतीय साइबर इमरजेंसी रेस्पोंसे टीम(CERT-In) के वैज्ञानिक श्री आशुतोष बहुगुणा, श्री अभिलाष सानी, मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस, नयी दिल्ली से ग्रुप कैप्टिन अशोक कटारिया, विंग कमांडर चरणजीत सिंह चावला, श्री प्रीतम दत्त गौतम, आदि विशेषज्ञों द्वारा सेवाएं दे गयी| कार्यशाला में उत्तराखंड मुक्त विश्वविधालय से प्रोफ. आर. सी. मिश्रा, प्रो. गोविन्द सिंह, प्रो. एन.पी. मेल्कानियाँ, डॉ. अखिलेश सिंह, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, डॉ. भूपेन सिंह श्री विनोद कुमार बिरखानी, सुश्री ममता कुमारी, डॉ. कमल देवलाल, डॉ. राजेंद्र सिंह क्वीरा, डॉ. भावना पलडिया, डॉ. चारु पन्त, डॉ. घनश्याम जोशी, श्री बालम दफौटी, श्री राजेंद्र गोस्वामी, श्री राजेश आर्या, श्री विनीत पौडियल, श्री मोहित रावत,डॉ. श्याम कुंजवाल, इं. अमनदीप कौर आदि ने शिरकत की|


Faculty Members


Prof. Durgesh Pant
Director
School of Computer Science & IT



Dr. Jeetandra Pande
Assistant Professor


Balam Singh Dafouti
Academic Associate


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Computing & Information Technologies have brought about a tremendous metamorphosis in the world, we live in.  In fact, no other technology has had such an indelible impact on the human society.
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